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प्रैस विज्ञप्ति - बीमा जागरूकता दिवस-2016


भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) की स्थापना की स्मृति में 19 अप्रैल 2016 को बीमा जागरूकता दिवस के समारोह का आयोजन प्राधिकरण द्वारा किया गया ।

 

अखिल भारतीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का अंतिम दौर पूर्वाह्न में आयोजित किया गया।  अंतिम दौर में चार बीमा कंपनियों की टीमों ने भाग लिया।  नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लि. की टीम विजेता रही, जबकि एक्साइड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लि. की टीम उपविजेता।

 

इसके उपरांत सर्वोत्तम बीमा जागरूकता नीतियों पर एक पैनल चर्चा की गई जिसका संचालन श्री पी. जे. जोसेफ, सदस्य (गैर-जीवन) द्वारा किया गया।  लक्ष्य-समूह के अनुसार विषय-वस्तु और वितरण को आवश्यकतानुसार तैयार करते हुए सभी हितधारकों अर्थात् बीमा कंपनियों, शैक्षिक संस्थाओं, बीमा परिषदों, आईआरडीएआई, अन्य विनियमनकर्ताओं और सरकार को संबद्ध करते हुए प्रिंट, इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के साथ बीमा जागरूकता के प्रति बहुविध और बहु-एजेंसी दृष्टिकोण अपनाने के बारे में पैनल एकमत थी।  सदस्यों ने महसूस किया कि बीमा व्यापन में वृद्धि तब होगी जब जनसाधारण को बीमा सेवाओं की खरीद और उपयोग करते समय बीमे की आवश्यकता से तथा शिकायत निवारण के माध्यमों से अवगत कराया जाए एवं करणीय और अकरणीय की जानकारी देते हुए बीमा जागरूकता को बढ़ाया जाए।  पैनल एकमत थी कि सरकार द्वारा प्रारंभ की गई सरल सामाजिक बीमा योजनाओं से तथा इन योजनाओं को लोकप्रिय बनाने के लिए सभी हितधारकों द्वारा प्रचार-प्रसार से बीमा समावेशन में सकारात्मक सुधार लाया जा सकता है।  तीन `सी' अर्थात् ग्राहक शिक्षा, दावा निपटारा और शिकायत समाधान बीमा क्षेत्र में विश्वास का निर्माण और प्रबलन करने में बीमाकर्ताओं की सहायता कर सकते हैं तथा स्वास्थ्य बीमा सहित, दोनों जीवन और साधारण बीमा खंडों में अधिकाधिक बीमा समावेशन के लिए सकारात्मक प्रबलीकरण के रूप में योगदान कर सकते हैं।

 

मुख्य समारोह अपराह्न में मुख्य अतिथि डॉ. वाई. वी. रेड्डी, अध्यक्ष, 14वाँ वित्त आयोग और भूतपूर्व गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा दीप-प्रज्ज्वलन के साथ प्रारंभ हुआ।

 

श्री टी. एस. विजयन, अध्यक्ष, आईआरडीएआई ने अपने स्वागत भाषण में निजी सहभागिता के लिए बीमा क्षेत्र को खोलने और आईआरडीएआई की स्थापना से लेकर बीमा क्षेत्र में प्रगति तथा बीमा (विधि) अधिनियम, 2015 द्वारा आईआरडीएआई को अधिकाधिक विनियामक शक्तियों के प्रत्यायोजन के परिणामस्वरूप वर्ष 2015-16 के दौरान महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में एक संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत की।

 

आईआरडीएआई द्वारा तैयार की गई उपभोक्ता शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराने की प्रथा को जारी रखते हुए जीवन बीमा अनुवृद्धियाँ; बीमा क्षेत्र का शिकायत निवारण; तथा मकान मालिकों और दुकानदारों की पॉलिसियाँ पर हस्त-पुस्तिकाओं का विमोचन  मुख्य अतिथि द्वारा किया गया। अखिल भारतीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजेताओं एवं वित्तीय शिक्षा के लिए राष्ट्रीय केन्द्र द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वित्तीय साक्षरता मूल्यांकन परीक्षा के दक्षिणी अंचल के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किये गये।

 

सहभागियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. वाई. वी. रेड्डी ने किन्हीं अन्य वस्तुओं और सेवाओं की तुलना में वित्तीय सेवाओं की विशिष्टताओं को देखते हुए बीमा जागरूकता के महत्व के बारे में बताया, क्योंकि वित्तीय सेवाएँ समय, स्थान, उपयोग और जोखिम,  वित्तीय मध्यवर्ती और ग्राहक के बीच सूचना की विषमता, संस्थाओं की सीमित देयता और अत्यधिक उन्नत स्वरूप के संदर्भ में दावों का विनिमय होती हैं।  वित्तीय विनियमनकर्ता की भूमिका वित्तीय क्षेत्र और वित्तीय मध्यवर्तिय़ों पर जनता के सदस्यों के विश्वास को मजबूती प्रदान करने की होगी।  उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन पर वित्तीय विनियमनकर्ताओं का जोर वैश्विक वित्तीय संकट के साथ प्रारंभ हुआ।  तथापि, उन्होंने सतर्क किया कि वित्तीय समावेशन आर्थिक विकास और प्रगति के अन्य पहलुओं के लिए एक साधन मात्र है, उसका अंत नहीं।  एक कॉल सेंटर, उपभोक्ता शिक्षा वेबसाइट आदि के माध्यम से बीमा साक्षरता को बढ़ावा देने में आईआरडीएआई के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने आईआरडीएआई से क्षेत्रीय भाषाओं में 24X7 आधार पर आवश्यकता के समय वित्तीय साक्षरता के लिए व्यापक सूचना उपलब्ध कराने के लिए एक पूछताछ केन्द्र के रूप में कॉल सेंटर को पुनर्व्यवस्थित करने पर विचार करने का अनुरोध किया।  एक प्रतियोगी और सुदृढ़ बीमा क्षेत्र का निर्माण करने तथा उसके द्वारा पॉलिसीधारक संरक्षण और बीमा क्षेत्र की सुव्यवस्थित वृद्धि को सुनिश्चित करने की दुहरी भूमिका का निर्वाह करते हुए इसे विश्व में एक विलक्षण और सम्मानित बीमा विनियमनकर्ता बनाने में आईआरडीएआई द्वारा किये गये प्रय़ासों की उन्होंने सराहना की।

 

सुश्री पूर्णिमा गुप्ते, सदस्य (बीमांकिक) ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

 

 


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