हम कौन हैं

हम पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा के लिए भारतीय बीमा उद्योग का विनियमन करते हैं, और उद्योग की क्रमिक वृद्धि के लिए कार्य करते हैं।

पृष्ठभूमि
  • 1991- भारत सरकार ने आर्थिक सुधार कार्यक्रम तथा वित्तीय क्षेत्र सुधार शुरू किए।
  • 1993- बीमा क्षेत्र में सुधारों की सिफारिश करने के लिए श्री आर.एन. मल्होत्रा (सेवानिवृत्त गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक) की अध्यक्षता में समिति गठित की गई।
  • 1994: मल्होत्रा समिति ने बीमा क्षेत्र का अध्ययन करने तथा पक्षकारों  की सुनवाई करने के बाद निश्चित सुधारों की सिफारिश की।
  • कुछ सुधार जिनकी सिफारिश की गई वह निम्नानुसार हैं
    • बीमा कंपनियों को प्रवर्तित करने के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों को अनुमति दी जानी चाहिए
    • विदेशी प्रवर्तकों को भी अनुमति दी जानी चाहिए
    • सरकार को अपनी विनियामक शक्तियाँ, एक स्वतंत्र विनियामक निकाय को सौंपनी चाहिए जो कि संसद के प्रति जवाबदेह हो।

आईआरडीएआई की स्थापना

  • भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) एक स्वायत्त निकाय है जिसकी स्थापना आईआरडीए अधिनियम, 1999 के अंतर्गत की गई
  • आईआरडीएआई का लक्ष्य: पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा करना, बीमा उद्योग तथा इससे संबंधित या इसके लिए आकस्मिक मसलों को का विनियमन, प्रर्वतन तथा क्रर्मिक वृद्धि को सुनिश्चित करना
आईआरडीएआई की गतिविधियाँ
  • बीमा अधिनियम, 1938 की धारा 114ए के अन्तर्गत बीमा उद्योग हेतु विनियम बनाना
  • वर्ष 2000 से नई बीमा कंपनियों को विनियमों के अनुरूप पंजीकृत करता है
  • उद्योग के स्वस्थ विकास के लिए तथा पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा के लिए बीमा क्षेत्र की गतिविधियों का पर्यवेक्षण करता है
वैधानिक विवेचन के लिए अंग्रेजी पाठ ही मान्य होगा संचालन : रेवालसिस
Close
आई.आर.डी.ए.आई. को जानें
  
आई.आर.डी.ए.आई. एक स्वायत्त निकाय है जो कि आई.आर.डी.ए. अधिनियम 1999 के अंतर्गत  स्थापित किया गया है।
 

आई.आर.डी.ए.आई. का लक्ष्य पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा करना तथा बीमा उद्योग को विनियमन एवं विकास करना।