मुख्य अतिथि, डॉ वाई.वी. रेड्डी का भाषण
आप यहाँ हैं

मुख्य अतिथि, डॉ वाई.वी. रेड्डी का भाषण

 

डा. यागा वेणुगोपाल रेड्डी, मुख्य अतिथि, द्वारा बीमा जागरूकता दिवस के अवसर पर दिनाँक

19-04-2016 को अंग्रेजी में दिये गए भाषण का हिन्दी अनुवाद

 

      अध्यक्ष श्री विजयन जी, आईआरडीएआई के प्रतिष्ठित सदस्य-गण, भूतपूर्व सदस्य-गण, अधिकारी-गण, स्टाफ एवं मित्रो,

 

     सबसे पहले मैं आईआरडीएआई के स्थापना दिवस को बीमा जागरूकता दिवास के रूप में मनाने हेतु आईआरडीएआई का अभिनंदन करना चाहता हूँ। आईआरडीएआई द्वारा की गई पहलों के बारे में मैंने जानकारी ली।  ऐसा प्रतीत होता है कि ये, शिकायत निवारण; विवाद समाधान; उपभोक्ता जागरूकता; वित्तीय साक्षरता; और लोकसंपर्क जैसे कई मोर्चों पर आगे हैं मैं अध्यक्ष श्री विजयन जी, और उनकी टीम को उनके पुरोगामी प्रयासों के लिए बधाई देता हूँ।

 

     श्री विजयन, ऐसे पहले व्यक्ति हैं जो एक विनियमित संस्था के अध्यक्ष से बीमा उद्योग के विनियामक निकाय के अध्यक्ष बने हैं, जिन्हें उद्योग में ग्राहक सेवा में एक नया प्रतिमान कायम करने का गौरव प्राप्त है।  मेरा विश्वास है कि यह संपर्क कार्यालयों की संकल्पना ही थी।   

 

     मैं सभी पुरस्कार-विजेताओं को उनकी श्रेष्ठता के लिए बधाई देता हूँ। मैं पाठ्य सामग्री का विमोचन विशेष रूप से तेलुगु में करने के लिए अत्यंत प्रसन्न हूँ।

 

     बीमा से मेरा व्यक्तिगत संपर्क पचास वर्ष पहले 1966 में हुआ था।  मेरे एक मित्र एलआईसी के एजेंट थे और उन्होंने मुझे 25,000/-रुपये का बीमा करने के लिए प्रेरित किया और मैंने वह बीमा करवाया।   कुछ वर्ष बाद जब मेरा विवाह हुआ और मेरे दो बच्चे हुए, तब मैंने कुछ अतिरिक्त राशियों के लिए बीमा करवाना चाहा, लेकिन मुझे बताया गया कि मैं बीमा करवाने के लिए अयोग्य हूँ। क्योकि मैं इन्सुलिन पर आधारित मधुमेह रोगी था ।  केवल मेरी कार का बीमा किया जा सका।  मुझे विश्वास है कि परिस्थितियों में काफी सुधार  आया हैवह चाहे मधुमेह रोगी हो या बीमाकर्ता!

 

     बीमा के साथ मेरा आधिकारिक संपर्क 25 वर्ष पहले 1990 के दशक के प्रारंभिक वर्षों में हुआ जब मैं वित्त मंत्रालय में था।  संयुक्त सचिव के रूप में मुझे बीमा क्षेत्र के सुधार पर एक नोट लिखना था।  उस समय, बीमा सरकारी क्षेत्र का एकाधिकार था।  मैंने स्वैच्छिक बीमा से विशिष्ट तौर पर पृथक् रूप में अनिवार्य बीमा के बारे में सूचना के लिए गैर-जीवन बीमा कंपनियों से अनुरोध किया।  उदाहरण के लिए, उद्योग स्थापित करने के लिए किसी ने आईडीबीआई से ऋण लिया, तो बीमा अनिवार्य था।  इसी प्रकार, प्रत्येक कार के मालिक के लिए कुछ बीमा करवाने की आवश्यकता थी।  हमने पाया कि कुल बीमे का लगभग 98% अंश अनिवार्य बीमा ही था।  दूसरे शब्दों में कोई भी तब तक बीमा नहीं खरीदता था, जब तक कानून के अनुसार अथवा वित्तीय लेनदेन की शर्त के अनुसार उसे विवश नहीं किया जाता था।  वह नोट एक छोटी निविष्टि थी जिससे आगे चलकर 1993 में बीमा क्षेत्र में सुधारों पर भारतीय रिज़र्व बैंक के भूतपूर्व गवर्नर की अध्यक्षता में मलहोत्रा समिति की नियुक्ति की गई थी।   इस समिति ने महसूस किया कि बीमा क्षेत्र को प्रतियोगिता के लिए खोला जाना चाहिए, जिससे ग्राहक सेवाओं और बीमा उद्योग के व्यापन में सुधार लाया जा सके।

 

     बीमा के विषय में, बैंकिंग के असमान, एक नई विनियामक संस्था की स्थापना आवश्यक थी और इसलिए आईआरडीएआई अस्तित्व में आई। मुझे यह देखकर प्रसन्नता है कि इस संस्था के निर्माण में आप काफी दूर तक आगे पहुँच चुके हैं। यह देखकर भी मुझे खुशी है कि बीमे की जागरूकता हेतु विनियामक प्राधिकरण पहलें करता रहा है। वास्तव में, बीमा जागरूकता से आईआरडीएआई के दोनों उद्देश्य पूरे होते हैं, उदा. वित्तीय साक्षरता के द्वारा बीमा पॉलिसियों के धारकों के हितों का संरक्षण करना, और वित्तीय समावेशन के माध्यम से बीमा उद्योग की सुव्यवस्थित वृद्धि का संवर्धन करना। 

 

     हमें वित्तीय साक्षरता की आवश्यकता क्यों है?  हमारे पास साग-सब्जी खरीदने के लिए कोई साक्षरता कार्यक्रम नहीं है,हमारे पास कपड़े या आवास खरीदने के लिए ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं है।  स्पष्ट है, कि वित्तीय क्षेत्र के बारे में कुछ तो विशेष है।

 

     जब लोग साग-सब्जी 200/- रुपये के लिए खरीदने के लिए जाते  हैं, तब वे यह सुनिश्चित करते हैं कि उसे सावधानीपूर्वक तोला गया है, वे उसकी गुणवत्ता की परख करते हैं, वे अपने हाथों से उनकी बनावट महसूस करते हैं, आदि।  बहुत-कुछ मोलभाव भी किया जाता है।  ऐसा क्यों है कि लोग किसी बैंक में जमा करते समय अथवा बीमा खरीदते समय हजारों रुपये रखने के लिए इतना समय क्यों व्यतीत नहीं करते? 

 

     मुझे यकीन है कि वित्तीय क्षेत्र की अलग विशेषता ही विश्वास और वित्तीय क्षेत्र के बीच का विशेष संबंध है।  विश्वास एक सर्वव्यापी मूल्य है, परंतु वित्त में विश्वास निर्णायक होता है।  वस्तुओं और सेवाओं का ऐसा कोई विनिमय नहीं है जो आप तुरंत महसूस कर सकते हों। आप केवल धनराशि का विनिमय कर रहे हैं जो भविष्य में वस्तुओं और सेवाओं के लिए दावा प्रदान करेगा। आप अब बीमा खरीदते हैं, और कुछ शर्तों के अधीन खरीदते हैं, और आपको धनराशि भविष्य में मिलेगी।  आप एक जमाराशि बैंक में  रखते हैं, और आपको धनराशि ब्याज के साथ कुछ समय बाद भविष्य में वापस मिलेगी।  परंतु, साग-भाजी की तरह ऐसा कुछ भी दृष्टिगोचर नहीं है। 

 

     धनराशि और वित्तीय प्रपत्र के विनिमय के साथ दावों की गतिविधि सम्मिलित होती है।  दावे स्थान पर गतिशील होते हैं,अर्थात् मैं किसी को हैदराबाद में धनराशि देता हूँ तथा वे विजयवाड़ा जाकर वहाँ उसे खर्च करते हैं। मैं आज धनराशि देता हूँ, और उसका उपयोग भविष्य में किसी समय किया जा सकता है। मैं कुछ जोखिम उठाते हुए एक मित्र को धनराशि देता हूँ, और वह मित्र मेरी तुलना में अधिक जोखिम उठाते हुए इसका उपयोग कर सकता है।  यह वित्तीय क्षेत्र में लेनदेन बनाता है, जिसे मैं कम दृष्टिगोचर कह सकता हूँ।

 

     जब भी हम आम व्यक्तियों की तरह किसी बैंक अथवा बीमा कंपनी के साथ लेनदेन करते हैं, हम अपने बारे में बहुत सारी जानकारी देते हैं। इस प्रक्रिया में बैंकर अथवा बीमा कंपनी हमारे बारे में बहुत-कुछ जानती है,लेकिन हमारे पास इन संस्थाओं के बारे में बहुत कम जानकारी होती है। जब हम स्वास्थ्य बीमा खरीदते हैं,तब बीमा कंपनी मेरे स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में बहुत-कुछ जानती है, लेकिन मैं बीमा कंपनी की वित्तीय स्थिति के बारे में बहुत कम जानता हूँ।

 

     अधिकांश वित्तीय मध्यवर्ती, सीमित देयता वाली संस्थाएँ हैं।  स्वामियों अथवा शेयरधारकों की देयता उतनी ही तक सीमित है जितनी कि उनकी पूँजी रखी हुई है।  इसलिए स्वामियों अथवा प्रबंधकों के लिए हमेशा ऐसा लोभ रहता है कि वे अत्यधिक मात्रा में उन्नयन करें और अत्यधिक जोखिम उठाएँ।  जब लाभ होता है तब उन्हें फायदा पहुँचता है, लेकिन जब उन्हें हानि होती है, तब वे दिवालियापन घोषित कर सकते हैं।  वित्तीय क्षेत्र में हम आम लोग वित्तीय मध्यवर्तियों के साथ लेनदेन करते हैं, जिनकी सीमित देयता होती है और जो कुछ हम उनके बारे में जानते हैं उसकी तुलना में वे हमारे बारे में अधिक जानते हैं।

 

     अनुभव ने दर्शाया है कि आधुनिक वित्तीय क्षेत्र की कुछ विशिष्टताएँ अनेक बुद्धिमान व्यक्तियों को इस क्षेत्र में आकर्षित करती हैं। यह मुख्य रूप से अन्य लोगों की बचत में लेनदेन द्वारा एक अल्प अवधि में बहुत बड़ी मात्रा में धनराशि अर्जित करने की संभाव्यता के कारण है।  इसका मतलब यह भी है कि वित्तीय क्षेत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए आकर्षक है जो दोनों मेधावी और धूर्त हैं।

 

     इसलिए, संक्षेप में वित्तीय क्षेत्र एक विशेष क्षेत्र है तथा इसके लिए उचित विनियमन की आवश्यकता है।  तथापि, यह भी महत्वपूर्ण है कि ग्राहक आँख मूँदकर जोखिम लेने के बजाय सूचना प्राप्त कर जोखिम उठाएँ और सुरक्षित रहें। अतः विनियमनकर्ता को चाहिए कि वह ग्राहक का संरक्षण करे, पर इतना अधिक नहीं क्योंकि प्रतियोगिता एवं ग्राहक सुरक्षा महत्वपूर्ण हैं।

 

     मैं गवर्नर के रूप में अपनी पदावधि के दौरान वित्तीय समावेशन, वित्तीय साक्षरता, वित्तीय परामर्श,आदि के विषय में किये गये व्यवहार में अपना अनुभव आपके साथ साझा करना चाहता हूँ।  मैंने दृढ़तापूर्वक महसूस किया कि वित्तीय क्षेत्र को वित्तीय सेवाओं पर उतना ही फोकस करना चाहिए जितना कि वित्तीय बाजारों पर।  जब भी लोगों ने श्रम बाजारों के बारे में बात की तब मुझे हमेशा असुविधा हुई, मानो लोग कोई वस्तुएँ हों। वित्त केवल वित्तीय बाजार मात्र नहीं है, बल्कि ऐसा कुछ है जो आम लोगों की सुरक्षा और उनके दैनंदिन जीवन के लिए अधिक महत्वपूर्ण है। 

 

     जब मैं गवर्नर था, तब लोगों ने मुझसे पूछा था कि मैं क्यों हमेशा आम व्यक्ति पर बल देता हूँ।  मैंने स्पष्ट किया कि मैं एक स्वार्थी व्यक्ति हूँ। मैं शीघ्र ही सेवानिवृत्त होने वाला था। एक बार सेवानिवृत्त होने के बाद मैं आम व्यक्ति बन जाऊँगा।  इसलिए, मैं अपनी देखभाल करने की कोशिश कर रहा हूँ।

 

     जो भी हो, अपने कार्यकाल के दौरान मैंने शून्य शेष खाता, उपभोग सरलीकरण के लिए ऋण, एटीएमों का विस्तार, सभी एटीएमों से निःशुल्क नकदी आहरण, आदि जैसे विषयों पर मैंने ध्यान केन्द्रित किया था। आम आदमी को सेवा प्रदान करने के रूप में सरकार से संवितरण के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग पर मैंने बल दिया।  यहाँ महबूबनगर में प्रयोग किया गया।  जहाँ तक ऋण का संबंध था, मैंने सूक्ष्म वित्त संस्थाओं को प्रोत्साहित किया, इस आधार पर कि वे लाभ कमाने वाली संस्थाएँ नहीं हैं इसलिए समर्थन के योग्य हैं।  मैंने बैंकों से अपेक्षा की कि वे सेवा के मानकों के तौर पर जो वादा उन्होंने किया उसका वितरण करें।  बैंकिंग संहिता और सेवा बोर्ड जो यू.के. के मॉडल पर एक उद्योग और संघ है, उस पहल का एक भाग रहा।

 

     अधिकांश अन्य पहलों के विषय में, हमारे प्रयासों में कुछ विफलताएँ थीं, कुछ सफलताएँ और कुछ मिश्रित सफलताएँ थीं, परंतु भारतीय रिज़र्व बैंक में हमारे द्वारा प्रतिपादित वित्तीय समावेशन को भारत सरकार द्वारा भी एक नीतिगत उद्देश्य के रूप में स्वीकार किया गया था।  

 

     वैश्विक वित्तीय संकट वित्तीय समावेशन के समूचे विषय को सामने लाया और  उसने वित्तीय क्षेत्र के सुधार के लिए वैश्विक कार्यसूची पर उसे ला रखा। वैश्विक वित्तीय संकट ने बड़ी वित्तीय संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने (बेल आउट) के लिए बड़ी मात्रा में धनराशि व्यय करने के लिए अनेक देशों को विवश किया। दोनों उन्नत अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों में यह सरकारों और केन्द्रीय बैंकरों को करना पड़ा।  बहुतों के द्वारा वित्तीय क्षेत्र को एक खलनायक की तरह देखा गया और फिर भी उन्हें राजकोष के अत्यधिक व्यय पर  सहायता प्रदान (बेल आउट) प्रदान की गई।  इसलिए वैश्विक स्तर पर नीति-निर्धारकों ने यह प्रदर्शित करने की आवश्यकता महसूस की कि वे वित्त के समान ही जनता के प्रति समान रूप से चिंतित हैं। इसलिए अत्यधिक व्यय पर बड़ी वित्तीय संस्थाओं को बेल आउट प्रदान करने में नीति-निर्धारकों ने जनता को कुल मिलाकर यह विश्वास दिलाना चाहा कि भविष्य में निर्माण करने की अपनी इच्छा के अनुरूप वे वित्तीय क्षेत्र में जनता के अपेक्षाकृत बड़े खंडों को प्रत्यक्ष हित का निर्माण कर रहे हैं। अधिक व्यापक और राजनैतिक संदर्भ में वैश्विक स्तर पर वित्तीय समावेशन और वित्तीय जागरूकता आदि पर दिये गये महत्व की हमें सराहना करनी चाहिए।

 

     वित्तीय समावेशन की व्याप्ति के लिए सीमाएँ जनता के खंडों के आर्थिक अथवा सामाजिक हानियों द्वारा निर्धारित की जा सकती हैं।  वित्तीय समावेशन का कार्यक्रम वित्तीय लेनदेनों, वित्तीय क्षेत्र की कवरेज, वित्तीय क्षेत्र के व्यापन और कौशल को सुसाध्य बनाने के लिए बहुत कार्य कर सकता है, लेकिन एक सर्वरोगहर रामबाण के रूप में मानने के लोभ को अवश्य प्रतिबंधित करना चाहिए।  अधिक से अधिक वह सुविधा प्रदान कर सकता है, परंतु रोजगार, विकास, समता अथवा परिवेशगत मित्रता का वितरण नहीं कर सकता। वैश्विक वित्तीय संकट की सर्वाधिक महत्वपूर्ण सीख को नहीं भूलना चाहिए।  अत्यधिक मात्रा में वित्तीयकरण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।  आवास का `बुलबुला' (अस्थायी खतरा)(हाउसिंग बब्ल) अत्यधिक वित्तीय समावेशन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।  विनियमन और विकास के बीच निरंतर पुनः संतुलन की आवश्यकता है।

 

     वित्तीय समावेशन ऐसी महत्वपूर्ण नीति है जो वित्तीय क्षेत्र के कार्यों के लिए एक मानवीय रूप देता है।  परंतु नीति में उसकी भूमिका इस बात पर निर्भर है कि किसी निर्दिष्ट देश में वित्तीय समावेशन का दायरा कितना व्यापक अथवा कितना संकीर्ण है। यह स्पष्ट रूप से तय करना उपयोगी है कि सरकार को क्या करना चाहिए, क्या केन्द्रीय बैंकर और विनियमनकर्ता कर सकते हैं तथा वित्तीय समावेशन के लिए राष्ट्रीय नीति के अनुसरण में वे परस्पर कैसे संबद्ध हैं।

 

     निष्कर्ष के तौर पर आज व्यक्त मेरे विचार मेरे अनुभव और अनुवर्ती गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए क्या  है ? वित्तीय साक्षरता केवल एक बिन्दु तक ही उपयोगी है।  कई लोगों का रुझान केवल अध्ययन हेतु वित्त के बारे में मनन करने और भविष्य में वित्तीय निर्णय लेने का नहीं होता।  साथ ही, किसी भी समय जब कोई आम आदमी किसी विशिष्ट अथवा संगत विषय के बारे में जानना चाहता है, तब वित्त से संबंधित विषयों को समझाने के साधन हमें प्राप्त करने चाहिए।

 

     यह देखकर मुझे प्रसन्नता है कि आईआरडीएआई के पास ग्राहक सुरक्षा के लिए कॉल सेंटर हैं।  इसके पास शिकायत कॉल सेंटर हैं।  मैं ग्राहक सुरक्षा केन्द्र में थोड़ा-सा विस्तार करना चाहता हूँ;  इसे एक `पूछताछ' (क्वेरी) केंद्र बनाइए।  यह पूछताछ केन्द्र एक प्रकार से माँग पर प्रयोजन मूलक वित्तीय साक्षरता के लिए केन्द्र होगा।  मैं स्पष्ट करता हूँ। सामान्य रूप से वित्तीय साक्षरता प्राप्त करने के लिए सभी लोगों को मनवाना कठिन हो सकता है।  लेकिन, हम विशिष्ट लेनदेनों हेतु उपयुक्त साक्षरता प्राप्त करने के लिए लोगों की सहायता कर सकते हैं, उदाहरण के लिए, जब वे जीवन बीमा अथवा स्वास्थ्य बीमा खरीदने विचार कर रहे हों। वर्तमान में हम कार्यात्मक वित्तीय साक्षरता केवल विक्रेताओं द्वारा विपणन से ही प्राप्त करते हैं। मैं जिस पूछताछ केन्द्र का सुझाव दे रहा हूँ, वह स्पष्ट करने अथवा सूचना देने के संबंध में व्यवहार करेगा, न कि विपणन अथवा शिकायत निवारण के संबंध में।

 

     उक्त पूछताछ केन्द्र जब भी आवश्यक हो, और जिस रूप में उपयुक्त हो, तब उस रूप में सूचना अथवा साक्षरता प्रदान कर सकता है। उक्त पूछताछ केन्द्र का एक 24X7 कॉल सेंटर होगा जो अंग्रेजी, हिन्दी और क्षेत्रीय भाषाओं में होगा जहाँ कोई भी कॉल कर सके। उदाहरण के लिए, जब मेरा सहायक एक स्वास्थ्य बीमा लेना चाहता है, उस विषय पर वह पूछताछ केन्द्र को कॉल करेगा कि उसको किस बारे में सूचना दी जाए।  उस केन्द्र को इस बात के लिए प्राधिकृत किया जाना चाहिए कि क्या स्पष्ट किया जाए अथवा आईआरडीएआई द्वारा पहले से ही तैयार की गई प्रकाशित सामग्री से क्या पढ़कर सुनाया जाए, अथवा उसके मोबाइल पर अथवा ई-मेल द्वारा संदेश के रूप में क्या भेजा जाए।  आईआरडीएआई के पास एक "बीमा साक्षरता और जागरूकता के लिए माँग पर सेवा" उपलब्ध होनी चाहिए जो पूछताछ केन्द्र (क्वेरी सेंटर) कहलाएगी।  अपेक्षित भाषा में मोबाइलों पर उत्तर देनेवाले पूछताछ केन्द्र कार्यात्मक, प्रयोजनमूलक, व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप बनाये गये, समय बचानेवाले और आवश्यकता होने पर उपलब्ध होंगे।

 

     अंत में, शिकायत निवारण के लिए समन्वित शिकायत प्रबंध प्रणाली, विवादों के व्ययरहित और त्वरित निपटान के लिए लोकपाल प्रणाली, सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए विषय-वस्तु के साथ वित्तीय साक्षरता देने के लिए एक समर्पित उपभोक्ता शिक्षा वेबसाइट,इन सब ने मिलकर आईआरडीएआई को विश्व में एक विलक्षण बीमा विनियमनकर्ता के रूप में प्रस्तुत किया है। एक और कदम बढ़ाइएः अपनी उपभोक्ता शिक्षा को परस्पर सक्रिय (इंटरएक्टिव) बनाइए, एक पूछताछ `विधि' (क्वेरी मोड) में।

 

     देवियो और सज्जनो, आप सबको धन्यवाद।  आईआरडीएआई को जन्मदिन की शुभकामनाएँ।

 

वैधानिक विवेचन के लिए अंग्रेजी पाठ ही मान्य होगा संचालन : रेवालसिस
Close