सेमिनार रिपोर्ट 2013-14

सेमिनार रिपोर्ट 2013-14

18 फरवरी 2014 को नगाँव (असम) में ग्राम विकास परिषद द्वारा `स्वास्थ्य बीमा' पर एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया।  इस सेमिनार में 180-200 सहभागी थे।

 

डॉ. आबू हनीफ़ा, वरिष्ठ पत्रकार ने सेमिनार का उद्घाटन किया।  उन्होंने बीमा और दावा प्रक्रियाओं में विद्यमान कठिनाइयों के बारे में अपने विचार व्यक्त किये।  श्रीमती एलीज़ा अहमद, अध्यक्ष, ग्राम विकास परिषद  ने अपने उद्बोधन में कहा कि पॉलिसी की सामग्री इतने छोटे आकार के अक्षरों में मुद्रित की जाती है कि वह पॉलिसीधारकों द्वारा आसानी से नहीं पढ़ी जा सकती।  उन्होंने सभी बीमाकर्ताओं से अनुरोध किया कि वे इस स्थिति को सुधारें ताकि पॉलिसीधारक उसे पढ़ सके और ठीक से समझ सके। श्री सिराजुद्दीन अहमद, महासचिव, ग्राम विकास परिषद ने अपने स्वागत भाषण में सेमिनार की विशिष्टता और बीमे के महत्व को स्पष्ट किया। 

 

पहला सत्र `स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की अपेक्षा' पर था जिसका संचालन श्री हेमंत तालुकार,एसबीआई लाइफ इन्श्योरेंस द्वारा किया गया, जिन्होंने स्वास्थ्य बीमा की महत्वता को  मनुष्य हेतु  विस्तार से बताया।  श्री विकास बोरा,आईसीआईसीआई लोम्बार्ड और श्री प्रांजल हजारिका, टाटाएआईजी वक्ता थे और उन्होंने बीमा कंपनी द्वारा स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों के मानकीकरण की विशेषताओं का विवेचन किया।  `वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशिष्ट पहलें' पर सत्र श्री तालुक्या सरमाह और श्री प्रदीप दास, ओरिएन्टल इन्श्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा संचालित किया गया जिन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा में की गईप हलों की विस्तृत जानकारी दी।  श्री रिदीप बापरनाश और श्री देवजीत गोस्वामी, एचडीएफसीबैंक, ने `दावा प्रक्रिया और तृतीय पक्ष प्रशासक  (टीपीए) की भूमिका' से संबंधित सत्र का संचालन किया। 

 

अंतिम सत्र में श्रीमती के.जी.पी.एल.रमा देवी, उप निदेशक, आईआरडीए ने एक प्रस्तुतीकरण किया और स्वास्थ्य बीमा के लाभों का विस्तार से विवेचन किया।  उन्होंने लोगों को सावधान किया कि वे कोई भी पॉलिसी खरीदने से पहले उसकी शर्तें ध्यानपूर्वक पढ़ लें।  उन्होंने आईआरडीए द्वारा पॉलिसीधारकों के संरक्षण के लिए की गई पहलों और पॉलिसीधारकों के लिए उपलब्ध शिकायत निवारण व्यवस्था के बारे में सूचित किया। वृत्त-चित्र, ऐनिमेशन फिल्में तथा आईजीसीसी, आईजीएमएस और उपभोक्ता शिक्षा वेबसाइट सेसंबंधित  आभासी यात्रा (Virtual Tour) भी सहभागियों को दिखाये गये।  यह स्पष्ट हुआ कि बीमाकर्ताओं के विरुद्ध शिकायतों का समाधान करने में बीमा कंपनियों के ऊपर एक विनियामक  के रूप में आईआरडीए की मौजूदगी के बारे में जानकर सहभागियों ने राहत की भावना महसूस की क्योंकि इसके पहले उन्होंने आईआरडीए और उसकी भूमिका के बारे में अधिक नहीं सुना था।  पहले चार सत्रों के सभी वक्ताओं ने बीमा के बारे में जानकारी स्थानीय भाषा अर्थात् असमिया में दी।

 

सेमिनार के दौरान सहभागियों के बीच आईआरडीए की उपभोक्ता शिक्षा सामग्री का वितरण किया गया।

 

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